दुराचारी पिता के लिए भावपूर्ण पंक्तियाँ

पिता का नाम तो भगवान जैसा था,
पर कर्म ऐसे कि शैतान भी शरमा जाए।


जिसने जन्म तो दिया, पर प्यार कभी न दिखाया,
हर रिश्ते को बस अपने स्वार्थ से निभाया।


जिस घर में छाया बनकर आना था तुझे,
तू वहाँ आँधियों की तरह तबाही लाया।


बेटा तुझसे डरता रहा, प्यार तो कभी मिला ही नहीं,
पिता था या सज़ा, समझ नहीं आया।


तेरी डांट में शिक्षा नहीं, ताने थे,
तेरे हाथों में ममता नहीं, बस ज़ुल्म के निशान थे।


तूने जो दिया, वो सिर्फ़ दर्द था,
और तूने जो छीना, वो मेरा बचपन था।

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